आज हम बात करेंगे सूरज के बारह भावो के विशेष फल के बारे में सूरज का रिलेशन हमारे बॉडी ,हमारी आत्मा ,काम क्या करना है , सरकारी कामो से , अब बात करते है ब्रह भावो के बारे में।
अगर सूरज पहले भाव में होगा तो वयक्ति हुकम करने वाले राजा जैसे होगा,जिसका ईमान और मजहब से कोई रिश्ता नहीं होता,उस वयक्ति का धर्म में विशवास हो जा न हो इसका उसके ऊपर को असर नहीं पड़ने वाला ,वह सिर्फ और सिर्फ इन्साफ को ही देखे गए ,वह हुकम चलते समय शांत सुभाब के साथ और दुसरो से काम लेते समय जरूरत से जयदा नरम न रहे ,
दूसरे भाव में सूरज मंदिर की जोत है,जो के किसी भी जाती के अंदर नहीं आता , मतलब के ऐसी जोत बिना किसे की सहारे आपने आप रौशनी बिखेरती है ,ऐसे वयक्ति की माली हालत साधारण ही होगी,उसकी अपनी किस्मत तो इतनी अच्छी नहीं होगी लेकिन अपने परिवार और बच्चो को जरूर मालामाल कर देगा ,परन्तु वह उनकी सेवा करेगा जा उनकी जरूरतों को पूरा करेगा , जे उसकी अपनी तरकी के लिए एक अच्छी बात होगी ,
तीसरे घर का सूरज शेर जैसे बहादुर होगा,जिस से मोत भी डरती होगी,वह दुसरो को हलवा पूरी खिलने वाला होगा,जो नेक कहेगा बो करके दिखयेगा ,दिल से सच्चा इंसान होगा।
चौथे भाव में सूरज जातक के लिए राजयोग कारक है ,ऐसे व्यक्ति के जनम के समय उसके पास एक फूटी कोड़ी भी न होगी परन्तु अपने बच्चो खर्च करने की ताकत देकर जायगा ऐसा वयक्ति किसी और औरत के साथ सबंध रखेगा तो खासतौर अपनी औलाद के बरबाद होने का कष्ट भोगेगा ,जा फिर उसके अपने घर में लड़का पैदा नहीं होगा,
अगर सूरज पांचवे भाव में होगा वयक्ति शरीफ और सांसारिक मर्यादा की पूरी तरह पलना करने वाला राजा होगा,अपनी पैदाइश से ही जगती हुयी किस्मत का मालिक होगा,उसका अपने हाथो से औलाद पर खर्च किया हुआ पैसा उसकी औलाद के लिए बहुत अच्छा फल देगा, मतलब के औलाद होर मालामाल हो जावेगी। ऐसा वयक्ति कैद किये बंदरो को आजाद करवाने के ख्याल रखता होगा,
सिक्स भाव में सूरज के बारे में लिखा है के आस्मां तो गरम था ही अब जमीन भी गरम होने लगी है ,जिद में आएगा तो अपने घर को जलता देख कर रोने की बजाए ख़ुशी मनाएगा ,खुद चाहिए बेवकूफ न होगा परन्तु उसकी तरफ से किया हुआ कारोबार आम तोर से बर्बाद ही होवेगा जा अशुभ असर ही देगा उसदी जुबान ते जिसम में गंदगी नहीं होगी ,चाहिए उसको किस्मत का बहुत मुकाबला करना पड़े,
सातवे भाव के सूरज के बारे में लिखा है के जिसके जनम के समय खानदान का सूरज पैदा हुआ है उसके जवान होते होते वह एक पूछल वाला तारा बन गया है ,उसने सब कुछ नेक नियत से क्या हुआ काम परन्तु रिजल्ट उल्टा ही निकला है ,वक़त दे राजे का हुकम अपने हक़ में नहीं होगा,चाहिए वह राज घराने में जनम ले लेकिन गद्दी पर बैठना नसीब नहीं होगा,अगर कोई हमे मरेगा तो हम भी उसे मार देंगे सूरज ऐसी सोच का मालिक बना देगा, यानि के कोई हमें खीजयेगा हम नहीं खीजयेगे बल्कि उसकी और ज्यादा खिजा देंगे।
आठवे भाव में सूरज होगा ,तो वयक्ति की पैदयेश चाहिए श्मशान में हुयी होगी परन्तु गुरु की गद्दी तक पुहंचने की हैसियत रक्त होगा,किसमत की हर नहीं होगी,परन्तु अपनी वजह से किया हुआ नुक्सान नहीं मिलेगा, भंडारी रहे तो भंडार कबि काम नहीं होंगे अगर साधु बन जायगा तो भिक्षा नहीं मिलेगी , मतलब के दुसरो से दान लेगा जा मदद की उम्मीद करेगा परमात्मा मार के निचे आकर मर जायगा,जब तक अपने खानदान पर खुनी हमला नहीं करेगा सूरज कभी खराब नहीं होगा,मतलब के ऐसा वयकित अपने रिश्तेदारों के साथ मुक़दमेबाज़ी जा किसे तरह दी दुश्मनी दी भावना न रखे ,
नोवे भाव के सूरज के बारे में कहते है के वह अपने खानदानी खून के इलावा अपने पडोसी की भी पूरी तरह परवरिश करेगा। पिछली बातों को भूल कर अभी की समय से नहीं घबराता ,दुनिया का सूरज तेरे साथ चल रहा है ,ऐसी सोच का मालिक होगा,मतलब है के वह अपनी पिछली नकामयाबी को बुला कर एक नए होंसले के साथ नए रस्ते पर चलने लग जाता है
दसवे भाव के सूरज के बारे में कहा गया है पैसा तो खरा है लेकिन बाजार में इसका कोई मुल्ये नहीं है,परन्तु दुसरो को माफ़ करने वाला और अपने ही माता पिता को फांसी की सजा सुनाने वाला होगा, कभी किसी की बात को बर्दाश्त नहीं करता ,किसी के आगे जुकता नहीं ,अगर जुकेगा तो सिर्फ अपने दोस्तों के आगे जाने के जिन दोस्तों के साथ खाने पिने जैसा प्यार है ,कालपुरष कुंडली के अनुसार सूरज अपने दुश्मन शनि की राशि मकर में है। जिस के कारण सूरज का ऐसा असर होता है।
गहरवे भाव का सूरज लालची होगा परन्तु तपी राजा जैसे होगा,जैसे जैसे नेकी करेगा वैसे वैसे उसका समाज में सम्मान बढ़ता चला जाता है ,अगर ऐसा वयक्ति कनक गेहू ( सूरज ) मीट ( शनि ) एक साथ खायेगा तो केतु जनि के नर औलाद उसका लड़का बर्बाद हो जायगा,इस भाव में सूरज दुसरो से नेकी करने वाला होगा,
बाहरवें भाव के सूरज के बारे में जे कहा जाता है वह सुख की नीद सोता है ,बेफिकर ,जिसको रूहानी शंकि जानने की इच्छा होती है। उसके राज में बन्दर भी अपना घर बनाना सिख जाते है ,अगर सूरज जहा अशुभ फल दे रहा होगा चोरी और डाका पड़ने की वारदात होती है। उसकी जिंदगी में बेआराम होगा ,जिस के साधु की सेवा और शुक्र की पलना शुभ सकेंत देगी , वह कभी गरीब नहीं होगा,
अगर सूरज पहले भाव में होगा तो वयक्ति हुकम करने वाले राजा जैसे होगा,जिसका ईमान और मजहब से कोई रिश्ता नहीं होता,उस वयक्ति का धर्म में विशवास हो जा न हो इसका उसके ऊपर को असर नहीं पड़ने वाला ,वह सिर्फ और सिर्फ इन्साफ को ही देखे गए ,वह हुकम चलते समय शांत सुभाब के साथ और दुसरो से काम लेते समय जरूरत से जयदा नरम न रहे ,
दूसरे भाव में सूरज मंदिर की जोत है,जो के किसी भी जाती के अंदर नहीं आता , मतलब के ऐसी जोत बिना किसे की सहारे आपने आप रौशनी बिखेरती है ,ऐसे वयक्ति की माली हालत साधारण ही होगी,उसकी अपनी किस्मत तो इतनी अच्छी नहीं होगी लेकिन अपने परिवार और बच्चो को जरूर मालामाल कर देगा ,परन्तु वह उनकी सेवा करेगा जा उनकी जरूरतों को पूरा करेगा , जे उसकी अपनी तरकी के लिए एक अच्छी बात होगी ,
तीसरे घर का सूरज शेर जैसे बहादुर होगा,जिस से मोत भी डरती होगी,वह दुसरो को हलवा पूरी खिलने वाला होगा,जो नेक कहेगा बो करके दिखयेगा ,दिल से सच्चा इंसान होगा।
चौथे भाव में सूरज जातक के लिए राजयोग कारक है ,ऐसे व्यक्ति के जनम के समय उसके पास एक फूटी कोड़ी भी न होगी परन्तु अपने बच्चो खर्च करने की ताकत देकर जायगा ऐसा वयक्ति किसी और औरत के साथ सबंध रखेगा तो खासतौर अपनी औलाद के बरबाद होने का कष्ट भोगेगा ,जा फिर उसके अपने घर में लड़का पैदा नहीं होगा,
अगर सूरज पांचवे भाव में होगा वयक्ति शरीफ और सांसारिक मर्यादा की पूरी तरह पलना करने वाला राजा होगा,अपनी पैदाइश से ही जगती हुयी किस्मत का मालिक होगा,उसका अपने हाथो से औलाद पर खर्च किया हुआ पैसा उसकी औलाद के लिए बहुत अच्छा फल देगा, मतलब के औलाद होर मालामाल हो जावेगी। ऐसा वयक्ति कैद किये बंदरो को आजाद करवाने के ख्याल रखता होगा,
सिक्स भाव में सूरज के बारे में लिखा है के आस्मां तो गरम था ही अब जमीन भी गरम होने लगी है ,जिद में आएगा तो अपने घर को जलता देख कर रोने की बजाए ख़ुशी मनाएगा ,खुद चाहिए बेवकूफ न होगा परन्तु उसकी तरफ से किया हुआ कारोबार आम तोर से बर्बाद ही होवेगा जा अशुभ असर ही देगा उसदी जुबान ते जिसम में गंदगी नहीं होगी ,चाहिए उसको किस्मत का बहुत मुकाबला करना पड़े,
सातवे भाव के सूरज के बारे में लिखा है के जिसके जनम के समय खानदान का सूरज पैदा हुआ है उसके जवान होते होते वह एक पूछल वाला तारा बन गया है ,उसने सब कुछ नेक नियत से क्या हुआ काम परन्तु रिजल्ट उल्टा ही निकला है ,वक़त दे राजे का हुकम अपने हक़ में नहीं होगा,चाहिए वह राज घराने में जनम ले लेकिन गद्दी पर बैठना नसीब नहीं होगा,अगर कोई हमे मरेगा तो हम भी उसे मार देंगे सूरज ऐसी सोच का मालिक बना देगा, यानि के कोई हमें खीजयेगा हम नहीं खीजयेगे बल्कि उसकी और ज्यादा खिजा देंगे।
आठवे भाव में सूरज होगा ,तो वयक्ति की पैदयेश चाहिए श्मशान में हुयी होगी परन्तु गुरु की गद्दी तक पुहंचने की हैसियत रक्त होगा,किसमत की हर नहीं होगी,परन्तु अपनी वजह से किया हुआ नुक्सान नहीं मिलेगा, भंडारी रहे तो भंडार कबि काम नहीं होंगे अगर साधु बन जायगा तो भिक्षा नहीं मिलेगी , मतलब के दुसरो से दान लेगा जा मदद की उम्मीद करेगा परमात्मा मार के निचे आकर मर जायगा,जब तक अपने खानदान पर खुनी हमला नहीं करेगा सूरज कभी खराब नहीं होगा,मतलब के ऐसा वयकित अपने रिश्तेदारों के साथ मुक़दमेबाज़ी जा किसे तरह दी दुश्मनी दी भावना न रखे ,
नोवे भाव के सूरज के बारे में कहते है के वह अपने खानदानी खून के इलावा अपने पडोसी की भी पूरी तरह परवरिश करेगा। पिछली बातों को भूल कर अभी की समय से नहीं घबराता ,दुनिया का सूरज तेरे साथ चल रहा है ,ऐसी सोच का मालिक होगा,मतलब है के वह अपनी पिछली नकामयाबी को बुला कर एक नए होंसले के साथ नए रस्ते पर चलने लग जाता है
दसवे भाव के सूरज के बारे में कहा गया है पैसा तो खरा है लेकिन बाजार में इसका कोई मुल्ये नहीं है,परन्तु दुसरो को माफ़ करने वाला और अपने ही माता पिता को फांसी की सजा सुनाने वाला होगा, कभी किसी की बात को बर्दाश्त नहीं करता ,किसी के आगे जुकता नहीं ,अगर जुकेगा तो सिर्फ अपने दोस्तों के आगे जाने के जिन दोस्तों के साथ खाने पिने जैसा प्यार है ,कालपुरष कुंडली के अनुसार सूरज अपने दुश्मन शनि की राशि मकर में है। जिस के कारण सूरज का ऐसा असर होता है।
गहरवे भाव का सूरज लालची होगा परन्तु तपी राजा जैसे होगा,जैसे जैसे नेकी करेगा वैसे वैसे उसका समाज में सम्मान बढ़ता चला जाता है ,अगर ऐसा वयक्ति कनक गेहू ( सूरज ) मीट ( शनि ) एक साथ खायेगा तो केतु जनि के नर औलाद उसका लड़का बर्बाद हो जायगा,इस भाव में सूरज दुसरो से नेकी करने वाला होगा,
बाहरवें भाव के सूरज के बारे में जे कहा जाता है वह सुख की नीद सोता है ,बेफिकर ,जिसको रूहानी शंकि जानने की इच्छा होती है। उसके राज में बन्दर भी अपना घर बनाना सिख जाते है ,अगर सूरज जहा अशुभ फल दे रहा होगा चोरी और डाका पड़ने की वारदात होती है। उसकी जिंदगी में बेआराम होगा ,जिस के साधु की सेवा और शुक्र की पलना शुभ सकेंत देगी , वह कभी गरीब नहीं होगा,
सूर्ये का बारह भावो का शुभ और अशुभ फल, hindi astrology, Jyotish kirpa
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