shukar in 1st to12th house शुक्र का बारह भाव में क्या प्रभाव होता है hi...

शुक्र

आज हम शुक्र के बारे में विचार करंगे ,शुक्र लाल किताब की मुताबिक और पराशरी और प्राचीन ज्योतिष के हिसाब से सातवा घर शुक्र का पका घर है। इस का सबंध वयक्ति की पत्नी के साथ है, शुक्र किन हालातो में अच्छा प्रभाव देता है और किन हालातो में बुरा प्रभाव देता है, हम इन के बारे में विचार करेंगे यहाँ पर एक बात बताना में आवश्यक समझता हु ,अगर वयक्ति की कुंडली में शुक्र बुध केंद्र भाव के घरो १,४,७,१० घर से बाहर एक दूसरे को सातवे भाव से देख रहे हो तो शुक्र का फल बहुत जायदा अशुभ हो जाता है। इसी प्रकार शुक्र और राहु इकठे बैठे हो जा फिर राहु शुक्र पर दृष्टि दाल रहा हो तो भी शुक्र का फल बहुत हद तक अशुभ हो जाता है। शुक्र इस्त्री और लक्ष्मी का कारक ग्रह भी है

अगर शुक्र पहले भाव में होगा तो वयक्ति अपने ही मन का मालिक होगा। जनि के वह अपने फैसले में एक हद से जयदा आगे निकल जायगा,लाल किताब में लिखा हुआ है के रजिया बेगम रानी होकर भी एक काले  गुलाम में प्यार में पड़  गयी थी यह एक इतिहासिक कहानी है। रानी ने अपने प्रेम को निभाने के लिए राज दरबार लोगो की परवाह न करते हुए अपने प्रेम को निभाया



दूसरे घर के शुक्र एक शुभ ग्रहस्थ की सूचक है। यहाँ बैठे शुक्र के कारण वयक्ति को अपने जा अपनी पत्नी खूबसूरत होने का थोड़ा घमंड जरूर रहता है। दूसरे वयक्ति भी उसे पसंद करते है। इस्त्री की कुंडली में दूसरे घर के शुक्र अधयापक होने का कारण बन सकता है।



तीसरे घर के शुक्र औरत होते होए आदमी जैसे हिमत रखने वाली होती है। लाल किताब के अनुसार शुक्र एक गाये  है लेकिन तीसरे घर में वह बैल बन जाता है जनि के वह वयकित सारी  उम्र बहुत म्हणत करता है ,इस तरह के वयकित में एक तरह का खिचाव होता है बहुत बार लोग ऐसे वयक्ति से प्रेम सबंद बनाने के लिए उस वयक्ति की तरफ खींचे चले जाते है।



चौथे घर में शुक्र अच्छा फल नहीं देते। वयक्ति को औलाद पैदा करने में मुश्किल पैदा करता है और गृहस्थ सुख में भी कमी का कारण बन जाता है।

पांचवे घर का शुक्र को शुभ ही मन गया है। लाल किताब में इसे बच्चो से भरपूर परिवार माना गया है। मतलब के परिवार में बहुत सारे लोग होते है और बच्चो का पूरा सुख मिलता है।



शठे घर शुक्र कोई अशुभ असर नहीं देते। यह एक ऐसी लक्ष्मी है जा फिर ऐसा धन है जिस की कोई भी कदर नहीं करता। बहुत बार यहाँ शुक्र यहाँ बैठ कर वयक्ति जा औरत में औलाद पैदा करने की ताकत को काम करने का कारण भी बनता है।

सातवे घर का शुक्र स्वतंत्र तोर से असर नहीं देता। लाल किताब में कहा गया है की शुक्र ग्रह जिस भी ग्रह के साथ बैठेगा उसी प्रकार का सुभह बना लेगा। उसके साथ बैठे ग्रह का असर उस पर जयदा होगा

आठवे घर के शुक्र को जाली हुयी मिटी कहा गया है। इसका मतलब है के पति और पत्नी के बिच में सुख की कमी करता है। परन्तु अगर यहाँ शुक्र मीन राशि ,तुला राशि ,जा फिर बृष राशि में होगा तो इतना अशुभ असर नहीं करेगा

अगर शुक्र नोवे घर में होगा तो इसके कारण धन हानि का खतरा बना रहता है। जा फिर कई बार शुक्र के सबंधी बीमारी , मतलब के कामवासना के साथ जुडी हुई बीमारी हो सकती है परन्तु ऐसे व्यक्ति के घर में पूरी सुख सुविदये होती है।



दसवे घर के शुक्र का अपनी समझ का असर भी शामिल हो जाता है। लाल किताब इस घर के शुक्र को ऐसी औरत कहा गया जो आदमी को भी हराकर रख दे ऐसे शुक्र वाला आदमी दूसरी औरत के साथ भी सबंध रख सकता है। ऐसे वयक्ति की औरत अपने फैसले अपने अपने पति पर दाल देती है और अपने ही फैसले को सही मानती है .

ग्यिरवे घर वाले वयक्ति की आदत गुमने वाले लाटो की तरह होती है। इसका मतलब है के वयक्ति अपने फैसले और नजरिये बार बार बदलता है। परन्तु धन दुलत पर इसका असर शुभ ही रहता है।



बारहवे घर के शुक्र को भवसागर पार करवाने वाली गाये कहा गया है। इसका मतलब है शुक्र पत्नी का कारक होने के कारण वयक्ति की जिंदगी अपनी पत्नी की तरफ से बहुत वड़ा योगदान मिलता है। ऐसे वैयक्ति को हर प्रकार के सुख सुविदये उपलभ्द रहती है और उनका फल भी अच्छा मिलता है। इस घर में शुक्र के शुभ होने कारण जे है कालपुरष कुंडली में बारहवे घर में मीन राशि अति है .जहा पर शुक्र उच्च राशि का हो जाता है .

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