समझे ग्रहों को एक एक लाइन में
ग्रहों के अंतर्गत आने वाले कार्य संछेप में इस प्रकार से हैं-.
बुध विस्तार और व्यापकता का भाव देता है, बुद्ध गोलाई है और सम्पूर्ण संसार एक घेरे के रूप में ही है जैसा की आपको पता है की पृथ्वी भी गोल है और उसके चरों तरफ गोल घेरा बुद्ध का ही है |
राहु बुध का सहयोगी और मित्र ग्रह है , लाल किताब में इसे नीला माना जाता है जैसे की आकास हमे नीले रंग का दिखाई देता है वो राहू ही है ,लेकिन इसका विस्तार कितना है,किसी ने आजतक उसे नाप नही पाया है,जितने पास जाने की कोशिश की जाती है,वह उतनी दी दूर होता चला जाता है|
सूर्य प्रकाश का दाता है, ये हमारी आत्मा का कारक ग्रह है | संसार में और हमारी आत्मा में रौशनी इसी सूर्य के कारण ही आती है
शनि को लालकिताब में अन्धकार के रूप में माना जाता है और हर इन्सान को किसी न किसी प्रकार के अन्धेरे से लडना होता है, उसी लडाई का नाम ही कार्य है और इसिलिय शनी देव को कर्म का कारक ग्रह कहा जाता है |
गुरु हवा का कारक है, जब तक जीव के अन्दर प्रवाहित होती रहती है,वह जिन्दा माना जाता है,और जैसे ही अपना स्वप्रवाह बन्द हो जाता है,जीव मृत्यु को प्राप्त हो जाता है,इसिलिय गुरु ग्रह को जीव का कारक ग्रह ज्योतिष में माना गया है |
शुक्र पाताल के रूप में जाना जाता है,जमीन के अन्दर क्या है,किसी को पता नही है,कितनी गहराई पर क्या छुपा बैठा है,यह सब मेहनत के बाद ही पता चलता है,
शुक्र बिज का कारक ग्रह भी है जब बिज शुक्र को जमीन शुक्र के अंदर डाला जाता है तभी नई फसल या प्राणी की उत्पति होती है |
केतु को शुक्र का सहयोगी माना जाता है, शुक्र को पत्नी का कारक माना गया है तो केतु को पुत्र का इसिलिय केतु हमेशा शुक्र का सहायक सिद्ध होता है |
चन्द्रमा को धरती माना गया है,इसके द्वारा ही किसी भी जीव का जन्म और आगे के जीवन के बारे में जाना जा सकता है | चन्द्र हमारे मन का कारक होता है और मानसिक शान्ति ही
जीवनका अंतिम उद्देश्य होता है \ मंगल अपना पराक्रम दिखाने वाला पूंछ वाला सितारा कहा गया है, इसके पराक्रम के बिना कोई भी कार्य संभव नही है. मंगल हमारे शरीर में खून का कारक ग्रह है और बिना खून के हम जीवन की कल्पना भी नही कर सकते है
ग्रहों के अंतर्गत आने वाले कार्य संछेप में इस प्रकार से हैं-.
बुध विस्तार और व्यापकता का भाव देता है, बुद्ध गोलाई है और सम्पूर्ण संसार एक घेरे के रूप में ही है जैसा की आपको पता है की पृथ्वी भी गोल है और उसके चरों तरफ गोल घेरा बुद्ध का ही है |
राहु बुध का सहयोगी और मित्र ग्रह है , लाल किताब में इसे नीला माना जाता है जैसे की आकास हमे नीले रंग का दिखाई देता है वो राहू ही है ,लेकिन इसका विस्तार कितना है,किसी ने आजतक उसे नाप नही पाया है,जितने पास जाने की कोशिश की जाती है,वह उतनी दी दूर होता चला जाता है|
सूर्य प्रकाश का दाता है, ये हमारी आत्मा का कारक ग्रह है | संसार में और हमारी आत्मा में रौशनी इसी सूर्य के कारण ही आती है
शनि को लालकिताब में अन्धकार के रूप में माना जाता है और हर इन्सान को किसी न किसी प्रकार के अन्धेरे से लडना होता है, उसी लडाई का नाम ही कार्य है और इसिलिय शनी देव को कर्म का कारक ग्रह कहा जाता है |
गुरु हवा का कारक है, जब तक जीव के अन्दर प्रवाहित होती रहती है,वह जिन्दा माना जाता है,और जैसे ही अपना स्वप्रवाह बन्द हो जाता है,जीव मृत्यु को प्राप्त हो जाता है,इसिलिय गुरु ग्रह को जीव का कारक ग्रह ज्योतिष में माना गया है |
शुक्र पाताल के रूप में जाना जाता है,जमीन के अन्दर क्या है,किसी को पता नही है,कितनी गहराई पर क्या छुपा बैठा है,यह सब मेहनत के बाद ही पता चलता है,
शुक्र बिज का कारक ग्रह भी है जब बिज शुक्र को जमीन शुक्र के अंदर डाला जाता है तभी नई फसल या प्राणी की उत्पति होती है |
केतु को शुक्र का सहयोगी माना जाता है, शुक्र को पत्नी का कारक माना गया है तो केतु को पुत्र का इसिलिय केतु हमेशा शुक्र का सहायक सिद्ध होता है |
चन्द्रमा को धरती माना गया है,इसके द्वारा ही किसी भी जीव का जन्म और आगे के जीवन के बारे में जाना जा सकता है | चन्द्र हमारे मन का कारक होता है और मानसिक शान्ति ही
जीवनका अंतिम उद्देश्य होता है \ मंगल अपना पराक्रम दिखाने वाला पूंछ वाला सितारा कहा गया है, इसके पराक्रम के बिना कोई भी कार्य संभव नही है. मंगल हमारे शरीर में खून का कारक ग्रह है और बिना खून के हम जीवन की कल्पना भी नही कर सकते है
कुछ शब्दों में नव ग्रहो के व्याख्या, Hindi astrology, Jyotish kirpa
Reviewed by Jyotish kirpa
on
08:29
Rating:
Reviewed by Jyotish kirpa
on
08:29
Rating:
No comments: