अशुभ राहु का हमारे आम जीवन पर असर और उपाय


 जब राहु अशुभ होता है तब इसके द्वारा मिलने वाले फल बहुत ही कष्टकारी और समझ से परे होते है।राहु के अशुभ होने पर यह अपना अशुभ प्रभाव जातक की सबसे पहले बुद्धि और मस्तिष्क पर डालता है क्योंकि राहु का शरीर नही है इसका केवल मस्तिष्क ही है मस्तिष्क बुद्धि और सोच-समझने की क्षमता देता है इस कारण यह केवल अपनी बुद्धि-विवेक और चतुराई से ही हर तरह के काम में हस्तछेप करता है।यदि यह अशुभ है तो सबसे पहले राहु जातक की बुद्धि पर अपना अशुभ प्रभाव डालकर उस जातक की बुद्धि और ठीक सोच-समझ को नष्ट कर देता है जिस कारण जातक गलत रास्ते को अपना लेता है उसको गलत रास्ता भी सही लगता है उसको पता होता है की जिस रास्ते पर मैं हूँ वह गलत है फिर भी वह बार बार उसी गलत रास्ते पर चल पड़ता क्योंकि अशुभ राहु उसकी बुद्धि और सोच-समझ को सही दिशा नही दे पाता।जिससे उसके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।कुंडली में अशुभ राहु होने के कारण जातक बार बार राहु के अशुभ प्रभाव में आकर गलत रास्ते अनुसरण करके खुद को परेशानियो में डालकर अपने जीवन के महत्वपूर्ण समय को भी बेकार के कामो में लगाकर खुद का नुकसान करता है ।अशुभ राहु के प्रभाव से प्रभावित ऐसा जातक यदि यह जान भी जाए की मेरा इस काम या रास्ते पर चलने से नुकसान है तो वह निकलना भी चाहे तो उसकी सोच और बुद्धि उसे सही दिशा में चलने नही देती और जातक बार बार राहु के द्वारा दिखाए गए गलत रास्ते का अनुसरण करता रहता है।अशुभ राहु वाला जातक यदि झूठ बोलता है तो उसका झूठ जल्द ही पकड़ा जाता है।यह सब फल ज्यादातर राहु की महादशा अन्तर्दशा या राहु से सम्बंधित अशुभ फल योग बनाने वाले ग्रहो की महादशा-अन्तर्दशा में होते है।। **राहु अशुभ कैसे होता है??** यदि कुंडली में राहु सूर्य चंद्र ग्रहण योग में हो, गुरु चांडाल योग में हो और इस पर शनि की दृष्टि हो राहु कमजोर या नीच का हो, राहु नीच का होकर मंगल, शनि, सूर्य, चंद्र के साथ हो, किसी अशुभ योग बनाने वाले ग्रहो के साथ हो आदि अन्य तरह से अशुभ हो तब इस तरह के अशुभ फल करता है।चंद्र से सम्बन्ध होकर अशुभ होने पर मानसिक तनाब, उदासी आदि, सूर्य से सम्बन्ध होने पर बार बार बेज्जती का सामना करना, आत्मसम्मान को ठेस पहुचना, पिता के सुख में कमी आदि, गुरु के साथ अशुभ हो तब पितृदोष लगता है ऐसे में धन, सौभाग्य की वृद्धि, भाग्योउन्नति नही हो पाती, धार्मिक कामो में रूचि कम रहती है आदि, मंगल के साथ अशुभ होने पर भाइयो से विरोध और रक्त सम्बंधित परेशानिया रह सकती है इसके आलावा जिस भाव में अशुभ होकर बैठता है यह उस भाव सम्बंधित फल को विशेष रूप से प्रभावित करके भाव सम्बंधित अशुभ फल करता है।शुभ राहु के फल बहुत श्रेष्ठ होते है शुभ राहु वाला जातक भाग्यशाली कहा जा सकता है क्योंकि राहु एक पाप ग्रह है और कलयुग में शनि राहु केतु जैसे ग्रहो का प्रभाव ज्यादा है इसी कारण शुभ राहु जातक के लिए एक तरह से वरदान है और शुभ और बलवान राहु की महादशा-अन्तर्दशा जातक के लिए काफी शुभ रहती है।। **अशुभ राहु शांति के उपाय** *अशुभ राहु की शांति के लिए सबसे श्रेष्ठ उपाय है राहु मन्त्र "ॐ रां राहवे नमः" 18000 जप करना चाहिए।। *बहुत ज्यादा अशुभ फल राहु के मिल रहे हो तब राहु ग्रह शांति हवन कराना राहु की अनुकूलता के लिए शुभ रहता है।। *भैरव पूजा या शिव पूजन करनी चाहिए, राहु के शुभ फल के लिए रुद्राभिषेक कराना शुभ रहता है।। *कुत्तो को बिस्टिक, ब्रेड या रोटी खाने को देनी चाहिए।। *शनिवार की देर शाम को तिल के तेल का दिया जलाकर राहु के 108 मन्त्र का पाठ करना चाहिए।। *काले या नील कम्बल का दान कोढ़ियों को या अनाथ आश्रम में करना चाहिए।साथ ही प्रतिदिन राहु के मन्त्र का जप करना चाहिए।। *जिस ग्रह के साथ राहु अशुभ सम्बन्ध बना रहा हो उस ग्रह की शांति के उपाय भी करने चाहिए।यदि यह नीच न हो शुभ हो पर कमजोर हो तब इसका रत्न गोमेद पहनना शुभ रहता है।।
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