कुंडली का दूसरा भाव
कुंडली का दूसरा भाव हमरी इज़्ज़त और धन के बारे में बताता है , इस घर से हमे मालूम होता है हमें समाज में कितना मान सन्मान मिलेगा जा फिर नहीं मिलेगा और हमारे पास धन दौलत कितनी होगी , यहाँ से हम अपनी मेहनत से कमाए धन के बारे में जान सकते है और जो अच्छे कामो से कमाए पैसो के बारे में बताता है , रिश्वत से कमाए हुए धन का सबंध सिक्स भाव से तो हो सकता है लेकिन दूसरे भाव से नहीं वयक्ति के अपने मकान के बारे में भी यह भाव थोड़ा इशारा करता है जैसे के वयक्ति का मकान कैसा होगा , छोटा होगा जा बड़ा होगा, क्या
दुकान होगी , कहने का अर्थ है के इस भाव से हमारे घर का भी सबंध है
दूसरे भाव का सबंध हमारी ऐश से वयतीत होने वाली जिंदगी के बारे में भी है ,यह भाव हमारे अंदर के ज्ञान ,हमारे अंदर अच्छाई जा बुराई ,हमारा लोगो के साथ सबंध हमारी मोह माया जा फिर दुसरो से काम निकलवाने की हमारी आदतों को बयान करता है। इस के इलावा हमरा मानसिक संतुलन और प्रेम सबंध भी इस भाव के साथ सबंध रखता है।
दूसरे भाव का करक बृहस्पति है परन्तु कालपुरष कुंडली के मुताबिक
यहाँ पर राशि शुक्र की पड़ती है। बृहस्पति इस भाव का करक होने के कारण यह भाव भी हमारी
अधियात्मिक के ज्ञान का करक है। इस गायन का विशेष सबंध हमारे जीवन के पहले हिसे यानि
के उम्र के पहले साल से लेकर पांचवे साल तक है।
हम अपनी लाइफ के इस हिसे में जो भी ज्ञान प्राप्त करते है वह इसी भाव से सबंध
रखता है। हमे अपने कर्मो से जो भी धन प्राप्त होता है मान सम्मान पाते है वह भी इसी
भाव से मिलता है। इस भाव का मिटी यानि के खेती की जाने वाली जमीन अदि का सबंध दूसरे
भाव से है। इसके इलावा ऊपर को उड़ने गैस , जैसे के पेट्रोल अदि से भी इसी भाव का सबंध
है , जो भी हम अपनी अच्छे कामो से कमाई करते है जो बचत होती है , अपनी पत्नी से मिलने
वाले धन जा फिर अधियात्मिक तोर से सन्यासी
के पैसो का कारक भी यही भाव है। यह कोई भी ऐसा पैसा जो अच्छे कामो से कमाया गया पैसा
हो वह इसी भाव से सबंध रखता है
.
दूसरा भाव हमारे जन्म मरण का दरवाजा भी है। इस भाव का सबंध हमारे
पिछले और अगले जन्म से भी सबंध है। परन्तु यह भाव से स्टिक फल कथन नहीं कर सकते इस भाव से ससुराल पक्ष को दर्शाता है। इस भाव से
ससुराल के हालत को भी देखा जाता है।
दूसरे भाव से हम देख सकते है किसी ने अपने घर में पालतू जानवर रखे
है। कैसे रखे है और कितने रखे है और कितने रखेगा। दूसरे भाव को धार्मिक स्थान भी माना
जाता है। अगर हम एक छोटी सी टहनी तोड़ कर पौदा लगते है, जैसे के मणि प्लांट। वह भी दूसरे
भाव से सबंध रखता है , क्योकि दूसरे भाव पर शुक्र का भी प्रभाव होता है। इसी कारण से जो पौधे छोटी टहनी जा किसी शाख से लगये
जाते है वह दूसरे भाव से देखे जाते है।
अगर हमने दिशाओ को इस भाव से देखना है तो वह है उतर और पछिम। इस
भाव में गुरु सबसे अच्छा फल देते है। ज्यादातर
इस भाव में बैठा ग्रह अच्छा फल ही प्रधान करता है बस आठवे भाव में कोई ग्रह न हो इस
भाव का करक ब्रस्पति है और चन्द्रमा यहाँ पर उच्च के हो जाते है। वयक्ति अपने जीवन
में अपने लिए कितने साधन प्राप्त कर पता है वह भी इसी भाव से मालूम चलता है। अगर हम
कालपुरष कुंडली के हिसाब से देखे तो यहाँ ब्रश राशि पड़ती है जो किसी भी ग्रह को नीच
नहीं करती
कुंडली का दूसरा भाव, दूसरे भाव से हम क्या क्या जान सकते है
Reviewed by Jyotish kirpa
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