चंद्र के बारे में विस्तार से विचार, Hindi astrology, Jyotish kirpa

नवग्रहों में चंद्रमा मन पर इसका पूर्ण प्रभाव होता है। किसी भी जातक के मन की स्थिति उसकी कुंडली में चंद्रमा और चंद्रमा पर पड़ने वाले प्रभावों से जानी जाती है।



कर्क लग्न वालों के लिए चंद्रमा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि कर्क लग्न में खुद लग्नेश होकर चंद्रमा मन और शरीर दोनों का पूरी तरह से प्रतिनिधित्व करता है। चंद्र का प्रभाव कर्क लग्न वालों पर ज्यादा होने से कर्क लग्न वाले जातक भावुक बहुत होते है।



चंद्रमा मन है चंद्रमा की शुभ अशुभ स्थिति के अनुसार ही जातक का मन प्रभावित होता है। चंद्र पर शुभ ग्रहो के प्रभाव से मन को शांति और सुख का अनुभव होता है।



शनि राहु केतु चंद्र के ग्रहो में सबसे बड़े शत्रु ग्रह है और नैसर्गिक रूप से ये पापी ग्रह भी है। जब मन रूपी चंद्रमा पर शनि राहु केतु का प्रभाव पड़ जाता है तब जातक के मन की शांति भंग हो जाती है।कितने भी सुख सुबिधा के साधन पास क्यों न हो फिर भी मानसिक सुख और संतुष्टि जीवन में कभी नही मिल पाती। जब मन सुखी और संतुष्ट रहेगा तब जीवन जीने की अच्छी कला का अनुभव भी होगा।



चंद्र का सम्बन्ध राहु केतु से होने पर ग्रहण योग बन जाता है जो जातक को सदैव मानसिक तनाब में रखता है ऐसे व्यक्ति सोचते ज्यादा है।



शनि का प्रभाव चंद्र पर होने से विषयोग बनता है यह स्थिति भी जीवन भर जातक को मानसिक रूप से बेचैन रखती है ऐसे व्यक्ति जीवन में कोई भी काम करना चाहे तो आसानी से वह काम नही हो पाता। मन उदासी से भरा रहता है।



शनि राहु केतु तीनो ग्रहो का चंद्रमा पर युति दृष्टि प्रभाव सबसे अशुभ होता है।शनि राहु केतु तीनों के संयुक्त प्रभाव से चंद्रमा बहुत अधिक दुष्प्रभाव में आ जाता है।ऐसी स्थिति में मन अस्थिर रहता है जातक करना कुछ चाहता है और कर कुछ बैठता है।



मन में एकाग्रता की कमी होती है इतने ज्यादा दूषित प्रभाव से ग्रसित जातक हर समय अपने आप को अकेला महसूस करते है भले ही वह अकेले न हो फिर भी मन में यह भावना बनी रहती है कि मैं एक तरह की हीन और कमजोर भावना बनी रहती है।चंद्र के साथ बुध भी इसी तरह दुष्प्रभाव में आ जाए तब जातक सामान्य स्वभाव से हटकर स्वभाव का होता है।



चंद्र सबसे तेज रफ़्तार से चलने वाला ग्रह है चंद्र मन को प्रभावित करता है इसी लिए व्यक्ति की सोच की कोई सीमा नही होती वह मिनटों में बहुत कुछ सोच लेता है यह चंद्र की तीव्र गति के प्रभाव के कारण ही होता है।



मानसिक रूप से मजबूत और अपने आप में समर्थ होना बहुत जरूरी बात है। जिन जातको की कुंडली में ऐसे ग्रह योग हो उन्हें शिव आराधना करने से लाभ मिलता है ।
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