क्या आप अच्छे कलाकार है, आईये जानते है ज्योतिष के माध्यम से, Hindi astro...

कलाकार (Artist) बनने के योग

ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथों में वीणा योग या वल्लकी योग का उल्लेख मिलता है जिसका फल बताया गया है इस योग वाले व्यक्ति की गीत संगीत नृत्य आदि कलाओं में रुचि होती है । इस योग वाले व्यक्ति कला के क्षेत्र में उन्नति कर सकते है । यह योग राहु केतु को छोड़ कर शेष बचे 7 ग्रहों से बनता है, सातों ग्रह अलग अलग सात राशियों में होने पर यह योग बनता है । इस योग के साथ साथ कलाकार बनने के अनेक योग और भी है, यदि वह योग भी इस योग को सहयोग देते हों तो व्यक्ति निश्चित ही अच्छा कलाकार बन सकता है ।

जन्म कुंडली मे द्वितीय भाव वाणी का है, गाने या बोलने से संबंधित कला का इस भाव से गहरा संबंध है । तृतीय भाव हाथों का भी है, और इच्छाओं का, कला का और विचारों का भी है, इस भाव का arts यानी कलाओं से बढ़ा गहरा संबंध है । चतुर्थ भाव हृदय का, विद्याओं का है ही, स्कूल कॉलेज में की जाने वाली पढ़ाई का बहुत गहरा संबंध चतुर्थ भाव से है । पंचम भाव बुद्धि का, इसका संबंध लेखन से भी है, तृतीय स्थान लेखन का है और पंचम स्थान तृतीय से तृतीय है, इसका संबंध पुस्तक, प्रबंध, साहित्य रचना आदि से भी है ।

शुक्र विशेषकर कलाओं से संबंध रखता है, लेकिन लिखने पढ़ने बोलने से संबंधित कला में बुध गुरु का भी बहुत महत्व है । चंद्रमा का भी ललित कलाओं से संबंध है ।

जिन लोगों के तृतीय भाव और भावेश बलवान और शुभ स्थिति में होते है वे प्रायःअच्छे लेखन या चित्रकला (drawing) या कोई वाद्ययंत्र (musical instrument) बजाने या हाथ से संबंधित कोई कला में प्रवीण हो सकते है । लेखन के लिए बुध गुरु का अच्छा होना और drawing या music के लिए शुक्र का अच्छा होना जरूरी है । द्वितीय और तृतीय भाव दोनों की शुभ स्थिति होने से गाने और बजाने दोनों में होशियार हो सकता है । लेकिन उसे अपनी कला में प्रसिद्धि मिलेगी या नही यह दशम भाव बताएगा ।

चतुर्थ भाव में शुक्र की अच्छी स्थिति वाले लोग संगीत,नृत्य, अभिनय, सिनेमा व शुक्र से संबंधित क्षेत्रों में सफल होते देखे गए है । चतुर्थ भावगत शुक्र की दृष्टि भी दशम भाव पर होती है, जिसका संबंध आजीविका से है ही । लेकिन दशम भाव मे शुक्र का दिकबल शून्य होने से उतना अच्छा परिणाम नही मिलता है जितना चतुर्थ के शुक्र का मिलता है क्योंकि चतुर्थ में शुक्र दिकबली हो जाता है ।

तृतीय भाव भावेश का संबंध लाभ या धन भाव या लाभेश या धनेश से बने तो व्यक्ति अपनी कला से धन भी कमा सकता है ।

इस विषय में मेरे अनुभव में कई कलाकारों की कुण्डलिया आई है उनमें से तीन का यहाँ उल्लेख करना चाहूंगा --

1. तृतीय भाव मे चंद्र कर्क राशि में था, जिस पर गुरु की उच्च दृष्टि थी । दशम भाव में शुक्र बुध थे । ये व्यक्ति एक बहुत अच्छे चित्रकार थे ।

2. कन्या लग्न था और वीणा या वल्लकी योग बन रहा था । द्वितीय भाव मे बुध, तृतीय भाव में शुक्र, और ग्रहबल में तृतीयेश सर्वाधिक बलवान था । साथ ही चंद्रकुंडली में 10 भाव में शुक्र था, जो कि चतुर्थेश और नवमेश था । ये एक अच्छे गायक और वादक है ।

3. सिंह लग्न में द्वितीय भाव मे गुरु शुक्र स्थित थे और इन पर चंद्रमा की पूर्ण दृष्टि थी । द्वितीयेश बुध चतुर्थ में था । ये बहुत अच्छे गायक वादक लेखक और कवि रहे । वैसे तो बहुत से वाद्ययंत्र इन्हें बजाने आते थे लेकिन बांसुरी बजाने में विशेष योग्यता थी, लेकिन इनके गले मे रोग होने से डॉक्टर ने इन्हें बांसुरी बजाने से एकदम मना कर दिया । गले के रोग के कारण ये गायन में भी बहुत आगे नही बढ़ सके । इनका द्वितीयेश बुध शत्रु राशि मे अस्त और क्रूर ग्रहों राहु, शनि और सूर्य के साथ था, चतुर्थ भाव में बुध को निष्फल भी कहा गया है । साथ ही शुक्र नीच राशि मे व शत्रु नवांश में था, और गुरु, शत्रु राशि और नीच नवांश में था , इन कारणों से इस क्षेत्र में इनको बहुत अच्छी सफलता नही मिल पाई ।

इस तरह जन्म कुंडली से यह पता चल सकता है कि कोई व्यक्ति कलाकार बन सकता है या नहीं और वह कलाकार बन कर सफल होगा या असफल ।

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