कर्क राशि पर शनि की साढ़ेसाती)
=====================
कर्क राशि चक्र के चतुर्थ नंबर की राशि है | इस राशि के स्वामी चन्द्र है | शनि चंद्रमा को अपना शत्रु मानता है, परन्तु चन्द्र शनि से सम भाव रखता है | इस राशि की साढ़ेसाती का आरम्भ मिथुन राशि में शनि के प्रवेश करते ही हो जाता है |
पहला चरण :-
गोचर में शनि के मिथुन राशि में प्रवेश करते ही कर्क राशि की साढ़साती का प्रथम चरण आरम्भ हो जाता है | यहाँ पर शनि अपनी मित्र राशि में होते है परन्तु मिथुन राशि के स्वामी बुध , चंद्रमा में शत्रुता रखते है इसलिए इस समय चंद्रमा को अशुभ फल अधिक प्राप्त होते है | स्वभाव में जिद्दीपन , वाणी में रूखापन , मन में अस्थिरता , कोई भी फैसला लेने में असक्षमता , मानसिक रूप में अस्थिरता बदले हुए स्वभाव के कारण मित्र भी शत्रु , धर्मिक कार्यो में विश्वास कम ,राजनितिक आधार पर हानि , मान सम्मान में कमी | वाहन चलाने में सावधानी रखे दुर्घटना के योग | व्यवसाय प्रभावित , मंगल भी अगर पीड़ित हो तो व्यक्ति को अग्नि कांड से भी हानि | घर अथवा व्यवसाय अग्नि कांड की सभावना| अपने खान पान में सावधानी बरते अन्यथा पेट सम्बन्धी परेशानी हो सकती है | लगातार होने वाली हानि से इतना निराश की नशे का सहारा | बहुत अधिक कर्जा न चूका पाने के कारण कानुनी कार्यवाही और कारावास के योग | नौकरी में हो तो किसी आर्थिक आरोप की सभावना |
महिला वर्ग को इस समय प्रजनन रोग के साथ रक्तविकार होने की अधिक संभावना | परुष हो अथवा महिला उन्हें साढ़साती के मध्य अपने सम्मान व चरित्र का विशेष ध्यान रखना चाहिए | विवादों से दूर रहे , आवास परिवर्तन की सभावना हो सकती है
दूसरा चरण :-
=======
चंद्रमा और शनि की शत्रुता के कारण कर्क राशि वालो के लिए इस साढ़ेसाती का दूसरा चरण बहुत अशुभ होता है | परन्तु बीच बीच में उन्हें कुछ शुभ फल भी प्राप्त होते है | स्वास्थ्य का विशेष ध्यान जीवन साथी से सम्बन्धो में मिठास रखनी चाहिए | कर्म क्षेत्र में बहुत अधिक मेहनत, मेहनत का फल कम , अपयश और अपमान अधिक , नौकरी हो या व्यवसाय इतना अधिक कार्य सिर दर्द और मानसिक तनाव , अदालत से कोई पुराना मुकदमा तो उसमे हार की सभावना . राजनितिक सम्पर्क होते हुए भी कोई लाभ नहीं , कर्जदारों से अपमान का सामना |
विधार्थी वर्ग का मन भी इस समय अपने अध्धयन में नहीं लगेगा | कर्क राशि वालो को अपने जीवनसाथी से भी समस्या का सामना पड़ सकता है | प्रतेक क्षेत्र में परिवर्तन व तबादले के आसार , यात्राओ के योग परन्तु हानि | चरण के अंतिम समय में कोई व्रद्घ व्यक्ति अवश्य ही आपको लाभ दे सकता है | इस समय आप भोग विलास की वस्तुओ पर अधिक खर्च |
चरण के अंतिम सप्ताह में आपको आराम अधिक मिलेगा | यह समय आपके लिए कुछ नई खुशिया लेकर आएगा | परन्तु सरकारी कार्यो में हानि हो सकती है
तीसरा चरण :-
========
इस चरण में शनि अपने प्रबल शत्रु सूर्य की राशि में है | सूर्य की राशि सिंह में होने पर भी शनि की द्रष्टि तुला कुभ और वृषभ राशि पर है | तुला और वृषभ राशि इसकी मित्र राशि है और कुभ इसकी स्वराशि है | इसलिए कर्क राशि वालो के लिए यह समय अधिक शुभ होता है | चरण का आरम्भ कुछ अशुभ फलो में होगा जैसे आय में हानि, खर्च अधिक परिवारिक तनाव , नौकरी और व्यवसाय में हानि कुछ समय के लिए आपको भूमि भवन से सम्बधित समस्या | काम का अत्यधिक बोझ ,खराब स्वास्थ्य | जो भी बात करे स्पष्ट करे टाल मटोल वाली प्रवृति ना रखे |
आपको इस समय सभी प्रकार के व्यसनों में दूर रहे क्योंकि अभी आपको शनि के सूर्य की राशि में प्रवेश के कारण कुछ अशुभ फल मिलगे | परन्तु जैसे जैसे शनि बलि होगे वैसे ही आपको अशुभ फलो में कमी होगी | अगर आप किसी भी तरह की बुरी आदतों का शिकार होगे तो शनि देव का आशीर्वाद नहीं मिलेगा | शनि के बलि होने से आपको सभी कार्यो में सफलता , सामाजिक सम्मान , आर्थिक लाभ भी मिलने आरम्भ हो जायगे | शारीरिक स्वस्थता , नया वाहन , नए भवन का योग | अचानक आय हर प्रकार का सुख , माता का स्वास्थ्य अच्छा , किसी की उधार देना पड़े तो पैसा डूब सकता है | लम्बी यात्रा और यात्रा से लाभ | किसी विशेष कार्य के इचुक तो कार्य कर सकते है | पिता को कष्ट की समभावना | भवन से सबधित मुकदमा तो जीत की सभावना
उपाय :-
=======
1) कर्क राशि वालो को शिवजी की उपासान और सोमवार को रुद्राभिषेक अवश्य करना चाहिए |
2) सरसों के तेल का छायादान करना चाहिए
=====================
कर्क राशि चक्र के चतुर्थ नंबर की राशि है | इस राशि के स्वामी चन्द्र है | शनि चंद्रमा को अपना शत्रु मानता है, परन्तु चन्द्र शनि से सम भाव रखता है | इस राशि की साढ़ेसाती का आरम्भ मिथुन राशि में शनि के प्रवेश करते ही हो जाता है |
पहला चरण :-
गोचर में शनि के मिथुन राशि में प्रवेश करते ही कर्क राशि की साढ़साती का प्रथम चरण आरम्भ हो जाता है | यहाँ पर शनि अपनी मित्र राशि में होते है परन्तु मिथुन राशि के स्वामी बुध , चंद्रमा में शत्रुता रखते है इसलिए इस समय चंद्रमा को अशुभ फल अधिक प्राप्त होते है | स्वभाव में जिद्दीपन , वाणी में रूखापन , मन में अस्थिरता , कोई भी फैसला लेने में असक्षमता , मानसिक रूप में अस्थिरता बदले हुए स्वभाव के कारण मित्र भी शत्रु , धर्मिक कार्यो में विश्वास कम ,राजनितिक आधार पर हानि , मान सम्मान में कमी | वाहन चलाने में सावधानी रखे दुर्घटना के योग | व्यवसाय प्रभावित , मंगल भी अगर पीड़ित हो तो व्यक्ति को अग्नि कांड से भी हानि | घर अथवा व्यवसाय अग्नि कांड की सभावना| अपने खान पान में सावधानी बरते अन्यथा पेट सम्बन्धी परेशानी हो सकती है | लगातार होने वाली हानि से इतना निराश की नशे का सहारा | बहुत अधिक कर्जा न चूका पाने के कारण कानुनी कार्यवाही और कारावास के योग | नौकरी में हो तो किसी आर्थिक आरोप की सभावना |
महिला वर्ग को इस समय प्रजनन रोग के साथ रक्तविकार होने की अधिक संभावना | परुष हो अथवा महिला उन्हें साढ़साती के मध्य अपने सम्मान व चरित्र का विशेष ध्यान रखना चाहिए | विवादों से दूर रहे , आवास परिवर्तन की सभावना हो सकती है
दूसरा चरण :-
=======
चंद्रमा और शनि की शत्रुता के कारण कर्क राशि वालो के लिए इस साढ़ेसाती का दूसरा चरण बहुत अशुभ होता है | परन्तु बीच बीच में उन्हें कुछ शुभ फल भी प्राप्त होते है | स्वास्थ्य का विशेष ध्यान जीवन साथी से सम्बन्धो में मिठास रखनी चाहिए | कर्म क्षेत्र में बहुत अधिक मेहनत, मेहनत का फल कम , अपयश और अपमान अधिक , नौकरी हो या व्यवसाय इतना अधिक कार्य सिर दर्द और मानसिक तनाव , अदालत से कोई पुराना मुकदमा तो उसमे हार की सभावना . राजनितिक सम्पर्क होते हुए भी कोई लाभ नहीं , कर्जदारों से अपमान का सामना |
विधार्थी वर्ग का मन भी इस समय अपने अध्धयन में नहीं लगेगा | कर्क राशि वालो को अपने जीवनसाथी से भी समस्या का सामना पड़ सकता है | प्रतेक क्षेत्र में परिवर्तन व तबादले के आसार , यात्राओ के योग परन्तु हानि | चरण के अंतिम समय में कोई व्रद्घ व्यक्ति अवश्य ही आपको लाभ दे सकता है | इस समय आप भोग विलास की वस्तुओ पर अधिक खर्च |
चरण के अंतिम सप्ताह में आपको आराम अधिक मिलेगा | यह समय आपके लिए कुछ नई खुशिया लेकर आएगा | परन्तु सरकारी कार्यो में हानि हो सकती है
तीसरा चरण :-
========
इस चरण में शनि अपने प्रबल शत्रु सूर्य की राशि में है | सूर्य की राशि सिंह में होने पर भी शनि की द्रष्टि तुला कुभ और वृषभ राशि पर है | तुला और वृषभ राशि इसकी मित्र राशि है और कुभ इसकी स्वराशि है | इसलिए कर्क राशि वालो के लिए यह समय अधिक शुभ होता है | चरण का आरम्भ कुछ अशुभ फलो में होगा जैसे आय में हानि, खर्च अधिक परिवारिक तनाव , नौकरी और व्यवसाय में हानि कुछ समय के लिए आपको भूमि भवन से सम्बधित समस्या | काम का अत्यधिक बोझ ,खराब स्वास्थ्य | जो भी बात करे स्पष्ट करे टाल मटोल वाली प्रवृति ना रखे |
आपको इस समय सभी प्रकार के व्यसनों में दूर रहे क्योंकि अभी आपको शनि के सूर्य की राशि में प्रवेश के कारण कुछ अशुभ फल मिलगे | परन्तु जैसे जैसे शनि बलि होगे वैसे ही आपको अशुभ फलो में कमी होगी | अगर आप किसी भी तरह की बुरी आदतों का शिकार होगे तो शनि देव का आशीर्वाद नहीं मिलेगा | शनि के बलि होने से आपको सभी कार्यो में सफलता , सामाजिक सम्मान , आर्थिक लाभ भी मिलने आरम्भ हो जायगे | शारीरिक स्वस्थता , नया वाहन , नए भवन का योग | अचानक आय हर प्रकार का सुख , माता का स्वास्थ्य अच्छा , किसी की उधार देना पड़े तो पैसा डूब सकता है | लम्बी यात्रा और यात्रा से लाभ | किसी विशेष कार्य के इचुक तो कार्य कर सकते है | पिता को कष्ट की समभावना | भवन से सबधित मुकदमा तो जीत की सभावना
उपाय :-
=======
1) कर्क राशि वालो को शिवजी की उपासान और सोमवार को रुद्राभिषेक अवश्य करना चाहिए |
2) सरसों के तेल का छायादान करना चाहिए
कर्क राशि पर शनि साढ़े सती का फल और उपाय, Hindi astrology, Jyotish kirpa
Reviewed by Jyotish kirpa
on
06:06
Rating:
Reviewed by Jyotish kirpa
on
06:06
Rating:
No comments: